Latest Quiz Of Electrical Equipment
आधुनिक युग में
विधुत धारा मनुष्य की मुलभुत आवस्यकताओं ने से एक है | सम्पूर्ण विश्व में विधुत
धारा का आधिपत्य है | इसका उपयोग मुख्यतः विभिन्न प्रकार के यंत्र, मशीन आदि के
संचालन एवं रोशनी उत्पन्न करने के लिए किया जाता है | यह दो प्रकार की होती
है-प्रत्याव्ती धारा (Alternating Current) एव दिष्ट धारा (Direct Current) |
1.धारा और वोल्टेज की अवधारणा
CONCEPT OF CURRENT AND VOLTAGE
इलेक्ट्रान (Electron) की गति ही
विधुत (Electricity) होती है | इलेक्ट्रान आवेश उत्पन्न करते है, जिसका दैनिक जीवन
में अत्यधिक उपयोग है | उदाहरणतया लाइट बल्ब, स्टीरियो, फोन आदि | ये सभी
इलेक्ट्रान की गति के आधार पर ही कार्य करते है | ये सभी एक ही मूल शक्ति के
स्त्रोत पर कार्य करते है- जो है इलेक्ट्रॉन्स (Electrons) की गति |
2.विधुत धारा
(ELECTRIC CURRENT)
आवेश के प्रवाह की दर को विधुत धारा
कहते है | किसी परिपथ में आवेश के प्रवाह की दर का मान उस परिपथ में समय के साथ विधुत
धारा के परिमाण को प्रदर्शित करता है | इसे I से प्रदर्शित करते है |
प्रतिरोधक
(RESISTORS)
प्रत्येक पदार्थ संभावित रूप से विधुत
धारा प्रवाह का विरोध करता है (क्योंकि प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया होती है )|
“जब किसी पदार्थ के टुकड़े अथवा उससे बने तार के एक अंश को एक निश्चित प्रतिरोध मान
प्रस्तुत करने वाले पुर्जे का रूप दे दिया जाता है तो वह प्रतिरोधक कहलाता है |”
अनेक प्रकार के विधुत परिपथो में भी प्रतिरोधक की आवश्यकता होती है, जैसे—फैन
रेगुलेटर, डी.सी. जनरेटर का वोल्टेज रेगुलेटर, फ्लोरोसेंट ट्यूब का डी.सी. परिपथ, नियोन टेस्टर आदि | यह
पुर्ज किसी परिपथ में आवश्यक मान का प्रतिरोध प्रस्तुत कर विधुत धारा प्रवाह में
मान को नियंत्रित करता है जिसके फलस्वरूप वोल्टेज में गिरावट आती है |
इसका उपयोग लोड के रूप में, फीडबैक एलीमेन्ट के रूप में, इनपुट सप्लाई हटाने के बाद आवेशित संधारित्र को डिस्चार्ज करने में, किसी परिपथ से प्रवाहित विधुत धारा का ज्ञात करने में एवं उसमे प्रवाहित विधुत धारा का मान करने के लिए किया जाता है |



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